दिव्यांग पुनस्र्थापना में करियर के अवसर

Naya Bharti
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दिव्यांग पुनस्र्थापना में करियर के अवसर

मनुष्य के प्रारंभिक जीवन से ही दिव्यांगता (Disability) किसी न किसी रूप में विद्यमान रही है। भारतीय विधि के अनुसार, 10 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता दी गई है, जैसे नेत्रहीनता (Blindness), श्रवण बाधा (Hearing Impairment), मानसिक विलंबन (Mental Retardation), ऑटिज़्म (Autism), और सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, विश्व की लगभग 10% जनसंख्या किसी न किसी प्रकार की विकलांगता से प्रभावित है। भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार, कुल 2.21% जनसंख्या किसी न किसी प्रकार की दिव्यांगता से ग्रस्त है।

दिव्यांग पुनस्र्थापना का महत्व

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर (Self-Reliant) बनाने के लिए उन्हें शिक्षित और प्रशिक्षित करना आवश्यक है। इस प्रक्रिया में कई विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है, जैसे विशेष शिक्षक (Special Educators), ऑडियोलॉजिस्ट (Audiologist), स्पीच पैथोलॉजिस्ट (Speech Pathologist), फिजियोथेरापिस्ट (Physiotherapist), और ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट (Occupational Therapist)। ये पेशेवर दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास करते हैं।

पुनस्र्थापना क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण

भारत में 1992 में भारतीय पुनस्र्थापना परिषद (Rehabilitation Council of India - RCI) की स्थापना के बाद दिव्यांग पुनस्र्थापना व्यवसाय को औपचारिक मान्यता मिली। RCI ने देशभर में 600 से अधिक संस्थानों को मान्यता प्रदान की है, जो प्रमाणपत्र (Certificate), डिप्लोमा, स्नातक (Bachelor), और स्नातकोत्तर (Postgraduate) स्तर पर पाठ्यक्रम संचालित करते हैं। प्रमुख संस्थान:

  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय दिव्यांगजन संस्थान, नई दिल्ली
  • अखिल भारतीय शारीरिक औषधि और पुनस्र्थापना संस्थान, मुंबई
  • स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय पुनस्र्थापना प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान, कटक
  • राष्ट्रीय लोकोमोटर दिव्यांगजन संस्थान, कोलकाता

मुख्य क्षेत्र और करियर विकल्प

  1. विशेष शिक्षा (Special Education) विशेष शिक्षकों की मांग बढ़ रही है, विशेषकर ऑटिज्म (Autism), सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy), और श्रवण बाधा (Hearing Impairment) जैसे क्षेत्रों में। D.Ed., B.Ed., और M.Ed. स्तर के कोर्स उपलब्ध हैं। लगभग 440 संस्थान विभिन्न दिव्यांगताओं के लिए विशेष शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करते हैं।

  2. ऑडियोलॉजी और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी (Audiology and Speech-Language Pathology) ये विशेषज्ञ श्रवण (Hearing) और वाणी (Speech) संबंधी विकारों के निदान और उपचार में मदद करते हैं। प्रमुख संस्थान:

    • अली यावर जंग राष्ट्रीय वाणी और श्रवण दिव्यांगता संस्थान, मुंबई
    • अखिल भारतीय वाणी और श्रवण संस्थान, मैसूर
    • श्री रामचंद्र विश्वविद्यालय, चेन्नई
  3. नैदानिक और पुनस्र्थापना मनोविज्ञान (Clinical and Rehabilitation Psychology) नैदानिक मनोविज्ञान में M.Phil पाठ्यक्रम दो वर्ष का होता है। प्रमुख संस्थान:

    • मानव आचरण एवं समवर्गी विज्ञान संस्थान, दिल्ली
    • मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, आगरा
    • रांची तंत्रिका और मनश्चिकित्सा संस्थान, रांची
  4. ऑर्थोटिक्स और प्रोस्थेटिक्स (Orthotics and Prosthetics) ये पेशेवर कृत्रिम अंगों (Artificial Limbs) के निर्माण और फिटिंग में विशेषज्ञ होते हैं।

    • इंडियन स्पाइनल इंजरीज़ सेंटर, नई दिल्ली
    • भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर
  5. पुनस्र्थापना सामाजिक कार्य और सलाहकार (Rehabilitation Social Work and Counseling) ये विशेषज्ञ दिव्यांगजनों और उनके परिवारों को सामुदायिक जागरूकता, रोजगार, और शिक्षा के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। प्रमुख संस्थान:

    • टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई
    • राष्ट्रीय सार्वजनिक सहयोग और शिशु विकास संस्थान, नई दिल्ली

करियर की संभावनाएं

दिव्यांग पुनस्र्थापना क्षेत्र में करियर की संभावनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। पुनस्र्थापना पेशेवर अस्पतालों, क्लीनिक्स, एनजीओ, शैक्षिक संस्थानों, और डे-केयर सेंटर्स में काम कर सकते हैं।

आवश्यकता और विकास

नीति आयोग के अनुसार, भारत में लगभग 1.82 लाख प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता है। यह क्षेत्र समाज सेवा में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए न केवल एक शानदार करियर का अवसर प्रदान करता है, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देने का अवसर भी देता है।

दिव्यांग पुनस्र्थापना क्षेत्र एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जो समाज को समान अवसर और समावेशिता की दिशा में ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



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