एससी-एसटी और ओबीसी को जनरल सीट का भी हक
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी नौकरी में आरक्षित वर्ग को सामान्य सीट पर भी मिलेगा अवसर
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, तो वे सामान्य (जनरल) सीटों पर चयन के पूर्ण हकदार होंगे।
इस फैसले का प्रभाव देशभर की सरकारी नौकरियों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में नामांकन प्रक्रिया पर पड़ेगा। इसे आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवारों की बड़ी जीत माना जा रहा है।
जनरल सीट का मतलब अब क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जनरल या ओपन कैटेगरी किसी एक जाति या वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होती। यदि कोई उम्मीदवार मेरिट के आधार पर जनरल कट-ऑफ पार करता है, तो उसे केवल उसकी सामाजिक श्रेणी के कारण रोका नहीं जा सकता।
इंदिरा साहनी केस का हवाला
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार केस का उल्लेख किया। जस्टिस दत्ता ने कहा:
“ओपन का सीधा अर्थ ओपन होता है। ओपन कैटेगरी की सीट किसी खास जाति या समूह के लिए आरक्षित नहीं है, यह सभी के लिए है।”
फैसले का महत्व
- आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवारों को समान अवसर
- जनरल सीट की परिभाषा और स्पष्ट
- मेरिट को सर्वोच्च प्राथमिकता
- सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता
यह फैसला भारतीय भर्ती प्रणाली में समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।